संपादक की कलम से.........

                         

संपादक

उत्तर प्रदेश पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा की दशा में एक अहम निर्णय लिया है। उसने रात में किसी अकेली महिला को सुरक्षित उसके घर पहुँचाने तक का बीड़ा उठाया है। अब इस काम को अंजाम देगा यू.पी. 112 में गठित महिला पी.आर.बी. रात 10ः00 बजे से सुबह 6ः00 बजे के मध्य सड़क पर किसी मुसीबत में फंसी अकेली महिला की काल आने पर महिला पी.आर.बी. उसे एक्काॅर्ट कर सुरक्षित गंतब्य तक पहुँचायेगी।
इस तरह की पहल निश्चित रूप से हैदराबाद में हैवानियत और उन्नाव जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने का काम करेगी महिलाओं में सुरक्षा के भाव को दृढ़ करेगी लेकिन पुलिस की सुरक्षा सुविधा रात में 10ः00 बजे के बाद और सुबह 6ः00 बजे तक ही क्यों। अहर्निश क्यों नहीं?
न तो वारदात के लिए समय तय होता है न ही सुरक्षा व्यवस्था को एक निश्चित समय सीमा में बाँधकर पुख्ता किया जा सकता है। वस्तुतः महिला सुरक्षा की दिशा में पुलिस प्रशासन को अभी और कई कदम उठाने होंगे। शहर के सभी क्लोज सर्किट टी.वी., कैमरों को एक कमांड सेंटर से जोड़कर उनपर सतत नज़र रखे जाने की व्यवस्था तय करनी होगी। देर शाम तक दफ्तरों में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को घर तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था करनी होगी।
इसके लिये निजि संस्थानों को कुछ कदम आगे बढ़ाने होंगे। रात 8ः00 बजे के बाद और सुबह 6ः00 बजे से पहले तक काम करने वाली महिला को घर तक पहुँचाने के लिये वाहन उसमें जी.पी.एस. महिला सुरक्षा कर्मी जैसी व्यवस्था मुर्हैया करानी होगी। समय पर सुरक्षा मानकों के औचक निरीक्षण की आदत डालनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण है आपात स्थिति से मुकाबला करने के लिए महिला को सशक्त बनाना।
आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ावा दिया जा सकता है। कुल मिलाकर महिला सुरक्षा की दिशा में चैतरफा पहल की जरूरत है। पुलिस प्रशासन ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वाह तो करे ही आम आदमी भी अपने सामाजिक दायित्व को समझे और किसी महिला के साथ ज्यादती की स्थिति में मुखर विरोध करे। क्योंकि बेटियाँ साझी होती हैं। समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है।

-संपादक




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